कालंद्री/ मुम्बई। नव परगना के लाल एवं महाराष्ट्र के केबिनेट मंत्री राज के. पुरोहित का जाना राजस्थान की धरती का अपूरणीय क्षति है! एक ऐसा योद्धा जो मुंबई की चकाचौंध भरी राजनीति में भी राजस्थानी गौरव को कभी नहीं झुकने दिया।
राज के. पुरोहित का राजनीतिक सफर राजस्थान से मुंबई तक एक प्रेरणा है। सिरोही जिले के फूंगणी गांव से निकलकर उन्होंने मुंबई की राजनीति में राजस्थानी समाज की मजबूत आवाज बनाई!!
विस्तृत करियर
1975 की इमरजेंसी के खिलाफ आंदोलन से राजनीति में कूदे, वकालत की पढ़ाई की। मुंबादेवी से चार बार (1990-2009) और कोलाबा से एक बार विधायक बने, कुल 25+ वर्ष विधानसभा में। 1995-99 में मनोहर जोशी सरकार में श्रम, दुग्ध विकास, संसदीय कार्य और बाद में गृहनिर्माण मंत्री रहे। भाजपा मुंबई अध्यक्ष, प्रदेश उपाध्यक्ष, व्यापार प्रकोष्ठ चेयरमैन जैसे पद संभाले।
सामाजिक योगदान
उत्तर भारतीय, खासकर मारवाड़ी-राजस्थानी प्रवासियों के मसीहा। अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन महासचिव, राजस्थान एसोसिएशन सलाहकार रहे। भाडेकरू नीति, आर्थिक सशक्तिकरण पर काम किया। स्पष्टवादी, हाजिरजवाबी के लिए प्रसिद्ध।
अंतिम दिनों की झलक
31 अगस्त 1955 जन्मे, 18 जनवरी 2026 को 71 वर्ष की आयु में बॉम्बे हॉस्पिटल में निधन। बीएमसी चुनाव परिणाम के बाद अस्वस्थ्य, लेकिन संघर्षी जीवन जिया। उनकी विरासत राजस्थानी एकता में बनी रहेगी।


